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2021-02-25

{21} चुप-खामोश रहने के फायदे|Benefits of being silent

 

{21} चुप-खामोश रहने के फायदे|Benefits of being silent

एक चुप सौ को हराता है।अच्छों अच्छों का मुंह बंद कराता है। 


कहने का मतलब यह है कि किसी वाद विवाद में पड़ना ग़लत है।यदि आपके साथ किसी बात को लेकर झगड़ा चल रहा है और आपके सामने वाला व्यक्ति आपकी बात समझने को तैयार नहीं हैं तब आप अपने आप को शांत रखकर उस झगड़े से बच सकते है। 

 

अगर आप धीरज धर थोड़ी देर शांती का परिचय देते हैं  तो सामने वाले व्यक्ति बोलकर अपना मुंह खुद बंद कर लेंगे।इससे आपकी ऊर्जा नष्ट होने से बचेगी और दूसरा आप झगड़े से बच जाओगे।जब थोड़ी देर बाद वह शांत होगा तब अपनी बात आप सुगमता से सबके सामने रख सकते हैं अपनी बात को शांत भाव से कहना समझदारी का परिचय है और ऐसा करने से दूसरे लोगों को पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

 

जैसा कि हम सभी जानते हैं,बहुत अधिक शब्द,बहुत जोर से और बहुत जल्दी बोले गए,पछताते हैं।एक बार जब आप चुपचाप बोलने की कला में महारत हासिल कर लेते हैं,तो आप पाएंगे कि आप अधिक शांतिपूर्ण महसूस कर रहे हैं।आपको कैसे पता चलेगा कि आपको इस ज्ञान की आवश्यकता है?अगर नीचे दिए गए सवालों का जवाब हां है,तो आपको इस क्रिया को अपनाना चाहिए इस को करने से आपको जरूर फायदा होगा।

1.क्या आप चाहते हैं कि आपसे गुस्से में कुछ नहीं कहा होता?

2.क्या आप चाहते हैं कि आप तुरंत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे और कोई गलत निर्णय न लें या सभी तथ्यों को प्राप्त किए बिना किसी को फटकार लगाई हो?

3.क्या आप चाहते हैं कि बिना आवाज उठाए आपका परिस्थितियों पर अधिक नियंत्रण हो?


चुप रहकर काफ़ी बार जीवन की कई समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।कई बार मौन रहकर हम दूसरों की मदद कर सकते हैं और नहीं भी करते। जहां पर हमारे चुप्पी साधने से लोगों का भला होता हो तो वहां हमें चुप्पी साध लेनी चाहिए।


अगर किसी की भलाई के लिए चुप्पी तोड़नी पड़े तो तोड लेनी चाहिए।यदि कोई व्यक्ति ग़लत है तो उसके लिए चुप्पी साधना ग़लत है।चुप्पी साधना हजारों लोगों के मुंह बंद करने के लिए एक रामबाण उपाय है।


चुप रहकर हम जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाल सकते हैं।कभी कभी चुप रहना जीवन में अमृत का काम करता है।चुप रहने से हमारे शरीर के अंदर ऊर्जा का संचार होता है।

 

जो व्यक्ति मौन रहता है उसके बारे में दूसरे व्यक्ति कुछ ज्यादा नहीं जान पाते।दूसरे लोगों में उसके लिए एक भ्रम बना रहता है कि इसका व्यवहार पता नहीं कैसा होगा।

 

कभी न कभी,हम किसी और से इतने क्रोधित या आहत हो गए कि हमने उनसे फिर कभी बात न करने का फैसला किया।हमने तय किया कि हमारे लिए,वे मर चुके हैं,वे मौजूद नहीं हैं।हमने तय किया कि उन्होंने हमारे साथ जो कुछ भी किया या हमसे कहा वह इतना आहत या दर्दनाक था,कि वे हमारे जीवन से बाहर होने के योग्य थे।

कभी न कभी हमारे साथ भी ऐसा ही हुआ है,जहां  कोई दोस्त,पड़ोसी या रिश्तेदार,हमारे शब्दों या व्यवहार से इतना क्रोधित या आहत हो गया कि उन्होंने अपनी चुप्पी से हमें मारने का फैसला किया। 

 

अगर हमें जीवन में कुछ हासिल करना है तो सुनने के लिए चुप रहना जरूरी है।अगर हमें सीखना है तो सुनने के लिए चुप रहना जरूरी है।अगर हमें लोगों की सेवा करनी है तो हमें सुनना चाहिए और ऐसा करने के लिए हमें चुप रहना चाहिए।इसे समझना आसान है,लेकिन इसे लागू करना बहुत कठिन है।


हम मौन में महान मूल्य पाते हैं क्योंकि हम सुनने की शाश्वत बारीकियों का अनुरोध करते हैं,यह मानते हुए कि संचार केवल समझ हासिल करने का एक और तरीका है।सुनने का ऐसा रूप पूरी तरह से आध्यात्मिक है;पूर्ण जीवन का अवतार।





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