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2021-02-25

"जो गरजते हैं वो बरसते नहीं"



जिस इंसान के अंदर कुछ कर दिखाने की चाह होती है वे बोलते नहीं करके दिखाते है।जो कुछ करके नहीं दिखा सकते हैं,उसे व्यर्थ में गर्जना नहीं चाहिए।


जब श्रीराम जी सीता जी को रावण के चुंगल से बचाने के लिए समुद्र पार करना चाहते थे तब समुद्र ने उनको रास्ता नहीं दिया तब श्रीराम ने क्रोध में आकर समुद्र को सुखाने के लिए धनुष पर बाण चढा दिया जिसे देखकर  वह घबराकर भगवान के चरणों में गिरकर रोने लगा तब भगवान को उस पर दया आ गई और बाण नहीं चलाया। श्रीराम जो कहते थे वो कर दिखाने में सक्षम थे। 


वचनबद्ध होना 

 

पहले युगों में जो व्यक्ति ने एक बार कह दिया वहीं पत्थर की लकीर मानी जाती थी लेकिन आज के समय में जो कह दिया उसको थोड़े समय बाद भूल जाते है।


आज के समय का व्यक्ति अपनी बात पर अडिग नहीं रहता।वह सिर्फ बोलना जानता है कुछ कर दिखाने की उसमें काबिलियत नहीं होती।आज के समय को देखते हुए एक-दूसरे पर विश्वास करना कठिन हो गया है क्योंकि आज का व्यक्ति धोखा देने में ज्यादा भरोसा रखता है।         

 

                    "जो गरजते हैं वो बरसते नहीं"


कलयुगी इंसान बड़ी बड़ी डींगे मारने में ज्यादा विश्वास करता है चाहे वह वो काम कर ना पाए। मनुष्य को उतना ही बोलना चाहिए जितना कि वह करने में सक्षम हो अन्यथा वह अपनी निंदा का शिकार हो सकता है। पहले तोलो फिर बोलो यह कहना ग़लत नहीं होगा। 

 

किसी भी काम को करने से पहले उसके विषय मे कुछ नहीं कहना चाहिए बस आपके अंदर उस काम को करने का सामर्थ्य होना चाहिए।इस दुनिया में कोई भी ऐसा काम नहीं है जिसे मनुष्य करने में सक्षम ना हो।


इस विषय को कुछ उदाहरण के साथ समझते हैं

1)बातों ही बातों में कुछ लोग कह देते हैं कि अरे इस काम में तो मैंने पीएचडी कर रखी है परन्तु मौका आने पर ऐसे लोग फ़िशड्डी साबित होते हैं

 

2)इनमे से ही कुछ लोग कहते हैं कि मैं खली जैसे पहलवान को धूल चटा सकता हूँ जब हकीकत से सामना होता है तो वे भीगी बिल्ली बन जाते हैं 


3)एक मुहावरे से आपका ध्यान दिलाना चाहता हूँ कि अपनी गली में तो कुत्ता भी शेर होता है अर्थात वो सिर्फ अपने घर में बोलना जानते हैं परन्तु बाहर जाकर कुछ करने लायक नहीं होते 


4)अपने अक्सर देखा होगा कि बादल जोर जोर से गरजने लगते हैं जिससे हमे यह परतीत होता है कि मूसलाधार वर्षा होने वाली है परन्तु कुछ देर बाद बदल शांत हो जाते हैं तभी तो कहा जाता है जो गरजते हैं वो बरसते नहीं

 

जो मनुष्य यह बोलता रहता है कि मैं यह काम भी कर सकता हूं और वह काम भी कर सकता हूं तो वह मनुष्य अंदर से खोखला होता है। उसके वश में कुछ नहीं होता।वह सिर्फ और सिर्फ अपने मन को तसल्ली ही दे सकता है।

 

एक व्यक्ति जो कुछ करने में सक्षम होता है तो उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है लोग उसकी निंदा चुगली करेंगे पर उसको घबराना नहीं चाहिए 

 

अहंकार के लक्षण

 

जो व्यक्ति अपने आपको दूसरों से ज्यादा होशियार मानता है उसे उसकी यही आदत जीवन में आगे बढ़ने नहीं देती।जो लोग अपने आप जीवन में कुछ कर नहीं पाए उनका काम सिर्फ और सिर्फ दुसरो की चुगली नींदा करना होता है ये लोग बड़ी बड़ी डिंगे   में विश्वास करते हैं आप तो कुछ कर नहीं सकते, इनको दुसरो कि खुशी और मेहनत से डर लगता है ऐसे लोग सर्वत्र एक जैसा ही व्यवहार रखते हैं इनकी जीवनशैली नीरस हो जाती है

 

सफलता प्राप्त करने की इनके मन में कोई उत्तेजना अथवा लालसा नहीं रहती दूसरों से ईर्ष्या करना ही इनका एकमात्र उद्देश्य रह जाता है ऐसे लोगो से सब किनारा करने लगते हैं क्यों की ये सिर्फ बोले हैं कर के कुछ दिखला सकते हैं

                    


इनमे अहंकार का इतना समावेश हो जाता है कि ये  दुसरो को अपने से कम कर के आंकने लग जाते हैं हर चीज़ में उनसे तुलना करने लगते हैं और अपने आपको सर्वश्रेष्ठ मानने  लगते हैं ऐसा सोचने वाले व्यक्ति अपने आप को अँधेरे में रखते हैं वे अंदर से  खोखले और बाहर से दिखावटी होते हैं

 

 

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