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2021-02-25

सत्य की परिभाषा क्या है?|TRUTH

 

"हाथ कंगन को आरसी क्या,पढ़ें लिखे को फ़ारसी क्या"


जो बात सही एवं प्रत्यक्ष होती है,उसे साबित करने के लिए किसी तरह के सहारे की आवश्यकता नहीं पड़ती।  क्योंकि जिस प्रकार सत्य हमेशा जीवित रहता है उसी प्रकार जो बात सही होती है वह भी हमेशा जीवित रहती है।जो समझदार इंसान होता है वह सही को सही और ग़लत को ग़लत कहता है। 

 

जो थोड़े को बहुत अधिक समझता है वही समझदार इंसान  है।उसको ज्यादा समझाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और ना ही ज्यादा बोलने की आवश्यकता होती है। 


सत्य की परिभाषा क्या है?



सत्य निरपेक्ष है

जब हम कहते हैं कि सत्य निरपेक्ष है, तो हमारा मतलब है कि सत्य अपने अस्तित्व के लिए मानवीय धारणा से स्वतंत्र है। सच से हमारा तात्पर्य है, वह जो मौजूद है कि हम उसे अनुभव करते हैं या नहीं। हम सच्चाई के बारे में कई अन्य निष्कर्ष निकाल सकते हैं।



पहला, चूंकि सत्य निरपेक्ष है, इसलिए इसे सार्वभौमिक होना चाहिए। चूँकि सच्चाई मानवीय धारणा से स्वतंत्र है, इसलिए यह मायने नहीं रखता कि किसी व्यक्ति की धारणा प्रश्न में है, या लाखों में। 

 

यह किसी भी मामले में स्वतंत्र है क्योंकि सत्य का आधार स्वयं वास्तविकता है न कि हमारी धारणा।



उदाहरण के लिए : यह सच है कि इस समय,आप इसे पढ़ रहे हैं।जो भी सत्य है,सर्वत्र सत्य है,हालाँकि उस सत्य के प्रति लोगों की धारणा भिन्न हो सकती है।

 

सत्य शाश्वत है|शाश्वत सत्य का अर्थ

उदाहरण: यह हमेशा सच होगा कि इस समय आप यह लेख पढ़ रहे थे। यह बीते हुए कल की एक सच्ची घटना होगी, साथ ही अब से एक बिलियन वर्ष बाद की भी। 


यदि उदाहरण के लिए भगवान मौजूद है, तो नास्तिक समाज त्रुटि में हैं। लेकिन अगर ईश्वर का अस्तित्व नहीं है,तो आस्तिक समाज गलती में हैं। चूँकि परमेश्वर का अस्तित्व मानवीय धारणा या विश्वास पर निर्भर नहीं है, एक सही है और एक गलत है। 

 

सत्य सार्वभौमिक है

इसके द्वारा हमारा मतलब है कि सत्य अपने अस्तित्व के लिए किसी की धारणा से स्वतंत्र है, दुनिया में हर किसी के लिए मान्य है कि क्या वे इसे जानते हैं,यह पसंद है या नहीं, और उपरोक्त सभी हमेशा के लिए सत्य है।जबकि आधुनिक सापेक्षतावादी इस निष्कर्ष को खारिज करते हैं,वे कभी यह दिखाने में सक्षम नहीं होते हैं कि इसे तार्किक रूप से कैसे नकारा जा सकता है।



सच्चाई की प्रकृति स्थापित करने के बाद, हम अब अपना ध्यान संबंधित और बहुत महत्वपूर्ण बात पर लगा सकते हैं: नैतिकता



क्या सत्य की प्रकृति और निरपेक्षता के आधार के बीच तार्किक संबंध को दिखाया जा सकता है? 

 


आगे,यह मुश्किल नहीं है।हमें केवल यह बताने की जरूरत है कि सच्चाई बताना नैतिकता का विषय है। अन्यथा हमें कहना होगा कि झूठ का सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है।



अगर झूठ के उदाहरण के रूप में सत्य और नैतिकता के बीच एक अविभाज्य लिंक मौजूद है,तो जो कुछ भी सच है वह नैतिकता का भी सच होना चाहिए।निरपेक्ष, सार्वभौमिक और शाश्वत नैतिक कानून मौजूद हैं यदि पूर्ण सत्य मौजूद है। 

 

इसका मतलब यह है कि कुछ चीजें हमेशा गलत होती हैं चाहे कोई भी इसे पसंद करता है,चाहे वह इसे मानता है या नहीं।इसका मतलब है कि कुछ नैतिक कानून पृथ्वी पर हर समाज पर लागू होते हैं,भले ही उनकी संस्कृति उन्हें पहचानती हो या नहीं।



नैतिक सत्य को शाश्वत होना चाहिए।नैतिकता की पूर्ण और सार्वभौमिक प्रकृति कभी नहीं बदल सकती है। "समय बदल गया है"यह कहना अच्छा नहीं है।समय बदल सकता है,लेकिन सच्चाई और नैतिकता तार्किक रूप से नहीं हो सकती।



फिर,हम यहां मानवीय धारणा के बारे में बात नहीं कर रहे हैं।व्यक्तियों और राष्ट्रों के बीच क्या सही और गलत है,इसके विचार काफी भिन्न होते हैं। 

 

यह अपने आप में सबूत के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है कि नैतिकता उन व्यक्तियों या संस्कृतियों के सापेक्ष है। 

 

इसका केवल यह अर्थ हो सकता है कि कुछ व्यक्ति या संस्कृतियाँ दूसरों की तुलना में नैतिक रूप से अधिक सही हैं,क्योंकि जैसा कि हमने दिखाया है,सत्य और नैतिकता दोनों को तार्किक रूप से निरपेक्ष होना चाहिए।


विचित्र किन्तु सत्य


प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती इसलिये जीवन मे जो कुछ भी हासिल करें अपनी मेहनत और सत्य के साथ करें,झूठ बोलकर कोई भी कार्य न करे और न ही न किसी कार्य की शुरुआत करें क्योंकि झूठ की बुनियाद कमजोर कड़ियों पर टिकी  होती है जो ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकता कोशिश करें सत्य का  साथ देने की और सत्य के साथ हमेशा बने रहने की । 

 

निश्चित रूप से, हम सभी सहमत होंगे कि सत्य के बारे में दुनिया के अपने विचार हैं और सत्य क्या है।दुनिया पूरी तरह से इस विचार को स्वीकार करती है कि आपके और मेरे पास सत्य का अपना संस्करण हो सकता है और दोनों संस्करण सत्य हैं


सत्य  ही आपको अपने जीवन मे आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा जिससे आपमें निरंतर साहस करने की क्षमता और नामुमकिन को मुमकिन करने की प्रबल इच्छा जागृत होगी।सत्य ही सुख है सत्य ही जीवन है  

 

आज के युग मे लोग झूठ का सहारा लेकर अपने अपने कार्य सिद्ध करने पर लगे रहते है वे सत्य के मार्ग पर चलने मे संकोच करते हैं सत्य कड़वा जरूर होता है परन्तु सत्य को कोई भी झुठला नहीं सकता। 

 

सत्य टकराव है।अगर हम सच की आँखों में देखने जा रहे हैं,तो हम अपने बारे में कुछ बातें देखेंगे।हम अपने पाप,शर्म और उद्धारकर्ता की बहुत आवश्यकता देखेंगे। आप सोच सकते हैं कि यह आपके आत्मसम्मान के लिए बहुत कुछ नहीं करेगा।सत्य हमारे पाप को सिर पर धारण करता है


कोशिश करें की अपने आस पास का माहौल भी सत्ययुक्त हो आप जिन लोगो के साथ उठते बैठते है कोशिश करें की वे  भी सत्य मार्ग पर चलने वाले हों  झूठे और छलकपट वाले लोगो से दुरी बना कर रखें वे केवल सत्य बोलने वाले और सत्य के मार्ग पर चलने वालों से घृणा करते हैं । 


अपने कार्य स्थल पर भी सत्य के साथ कार्य करें और आप देखेंगे की आपका जीवन कितना बदल जायेगा जीने की चाहत जागेगी माना की आज के युग मे सत्य पर कुछ समय के लिए झूठ हावी हो जाता  परन्तु कितने समय के लिए आखिर सत्य की ही विजय होती है ।  


प्रभु का मार्ग भी सत्य द्वारा ही प्राप्त  किया जा सकता है जो लोग सत्य के मार्ग पर चलकर अपना कार्य सिद्ध करते है उनकी सदा ही विजय होती है और प्रभु भी उन्ही लोगो का साथ देते हैं झूठ का पुलिंदा ज्यादा दिन तक ठहर नहीं सकता आखिर में झूठ को झुकना या हार माननी पड़ती है और सत्य की विजय होती है।  




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