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2021-02-15

सम्मान की प्राप्ति कैसे हो ?

 

सच ही कहा है किसी ने जहां पर इंसान को आदर सम्मान और प्यार मिलता है उसको वहीं पर जाना चाहिए अन्यथा उस स्थान का तो पानी भी नहीं पीना चाहिए।                                             

                            



यह एक दृढ़ विश्वास है कि मनुष्य एक  दूसरे के लिए सम्मान रखते हैं जो  अनिवार्य  है।किसी मुद्दे पर हमारे अलग-अलग विचार होना स्वाभाविक है।


कोशिश करें अपनी अच्छी छवि बनाने की जिससे और लोग भी आपका सम्मान करें आज के दोर में साफ़ छवि बनाना बेहद ही चुनौतीपूर्ण कार्य है इसके लिए आप अच्छे लोगो के बारे में ज्ञान प्राप्त करें दुसरो का भी आप सम्मान करें अगर आप खुद दूसरे का आदर सम्मान नहीं करेंगे तो आपका भी कोई सम्मान और प्यार नहीं करेगा जो आप दूसरे को दोगे वही आप खुद पाओगे या यूँ कहें जब बोये पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होये 

 

सम्मान की प्राप्ति कैसे हो विषय बारे में कुछ महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किये गए है जिनपर आप अमल कर सकते हैं


1.स्वयं का सम्मान करें

 

यदि आप अपने आप का सम्मान नहीं करते तो कोई भी आपका सम्मान नहीं करेगा।खुद का सम्मान करना बुनियादी बातों से शुरू होता है आपकी व्यक्तिगत स्वच्छता और आपका सामान्य व्यवहार,आपके बोलने का तरीका,जिस तरह से आप दुसरो के सामने खुद को व्यक्त करते हैं,लेकिन यह पहली छाप है जिसे लोग याद करते हैं और संचार के द्वार खोलते हैं इसलिए सबसे पहले और सबसे पहले खुद का सम्मान करें 


2.अपनी बात रखें

 

बोलने से पहले सोचें।गलत शब्द हमे नहीं बोलने चाहिए ।ऐसे वादे न करें जिन्हें आप निभा नहीं सकते। किसी की बुराई न करें, यदि आपसे आपकी राय मांगी जाती है, तो वस्तुनिष्ठ बनें और रचनात्मक सलाह दें। 


सबसे प्रेम से बात करें सबका सम्मान करें किसी की चुगली अथवा निंदा न करें कठोर और कड़वे वचन किसी को न बोलें आपकी वाणी में मिठास और मधुरता होनी चाहिए जिससे आप  सम्मान और प्यार के पात्र बनेगें हर कोई आपसे बात करना पसंद करेगा कार्यस्थल हो घर हो या आपकी सोसाइटी हो हर जगह आपका रुतबा बढ़ेगा 


3.शिष्टाचार से क्या आशय है

 

यह किसी भी स्थिति में महत्वपूर्ण है। किसी भी  अपवाद की स्थिति में अपने शिष्टाचार पर ध्यान दें।दयालु, विचारशील बनें।क्रोधित,नकारात्मक, आत्मग्लानि बनने से कोई भी आपका सम्मान नहीं करेगा ।

 

किसी पर क्रोध करना भी उचित नहीं क्रोध हमेशा बनते काम भी बिगाड़ देता है धैर्य धरे और अपने कार्य को शालीनता से करें वे लोग ही जीवन में सफलता प्राप्त करते है जिनका मन और स्वभाव शांत  होते हैं 

 
दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप चाहते हैं कि आपके साथ व्यवहार किया जाए-कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कौन हैं आपसे श्रेष्ठ या निम्न, बड़े या छोटे, पुरुष या महिला,उन सभी के प्रति आपका व्यवहार शिष्टा युक्त  होना चाहिए।


आज के  दौड़ भाग भरे जीवन में किसी के पास इतना समय नहीं होता की इत्मीनान से किसी की बात सुनी जाये अगर कोई आपकी बात धीरज धर सुन भी रहा है तो वो उस पर अमल नहीं करेगा क्योकि उसके पास इतना समय ही नहीं है वह मन ही मन आप पर क्रोधित भी होगा और शायद आपको उसके व्यस्त समय में से कुछ पल न लेने के लिए भी बोल दे परन्तु आप धीरज न खोएं यही तो आपकी अच्छाई मानी जाएगी ।

 

आज के युग में लोगों को अच्छी बातें कड़वी लगती हैं वे उन्हें एक कान से सुन कर दूसरे से निकाल देते हैं अथवा अनसुनी कर देते हैं यह उनके व्यवहार से भी आपको प्रतीत हो जायेगा 

 

4.प्रामाणिक रहें

 

इसका मतलब है कि आप खुद के साथ-साथ दूसरों के साथ भी ईमानदार हैं। एक समुदाय में एक अच्छी प्रतिष्ठा बनाने और सभी का सम्मान करने में लंबा समय लगता है परन्तु झूठ फरेब से इसे तुरंत तोडा जा सकता हैआँख मिलाना ज़रूरी है,आंख से आंख मिलाने पर आपको उनकी ईमानदारी का पता लग सकता है जो व्यक्ति नजरों से नजरें नहीं मिला सकता उसके दिल में चोर होता है या यूँ कहें कि वह विश्वास के काबिल नहीं हैं

 

दूसरों से शालीनता से पेश आयें उनका आदर करें और खुद भी आदर -सम्मान प्राप्त करें ।किसी का सम्मान पाना आपकी पसंद या नापसंद से उसका सरोकार नहीं है अगर आप किसी का सम्मान करते हैं तो आपको भी तो सम्मान मिलेगा हमें सम्मानजनक व्यवहार और उसका अनुकरण करना ही पड़ेगा।

 

अगर आपको दूसरों से सम्मान चाहिए, तो आपको अपने लिए सम्मान से शुरुआत करनी चाहिए।दूसरों के सम्मान के योग्य होने के लिए आत्म सम्मान एक आवश्यकता है।सम्मान एक सामान्य  व्यवहार है जो इस बात से शुरू होता है कि हम दूसरे लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं।एक-दूसरे के प्रति सम्मान से हम सभी को लाभ पहुंचाने वाले समाधान मिलते हैं।जो 

हमें करना चाहिए 

 

हम में से अधिकतर चाहते हैं कि मनुष्य के रूप में उन्हें सम्मानित किया जाए।अपनी भावनाओं,इच्छाओं के लिए उचित सम्मान के साथ व्यवहार करने के हकदार हैं।स्टैनफोर्ड इनसाइक्लोपीडिया ऑफ फिलॉसफी के अनुसार 18 वीं शताब्दी के जर्मन दार्शनिक इमानुएल कांट "नैतिक सिद्धांत के केंद्र में स्वयं को शामिल करने वाले व्यक्तियों के लिए सम्मान रखने वाले पहले प्रमुख पश्चिमी दार्शनिक थे।



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